माना घोर अंधेरी राते, और उजाले कैद हुए।
सूरज संग जुगनू भी सारे लगता है संवेद हुए।
हिम्मत ना टूटे कोई सब आयु कर्म के बन्धन है
आशाओ के दीप जले उम्मीदों से अनुबंधन है।
वक्त बीत जायेगा ये भी बस मन मे विश्वास रखें
कर्मो का लेखा जोखा है इतना सा आभास रखे।
सूरज फिर निकलेगा देखो सब मिल कर यह जतन करें।
पहले भय को दफ़न करें और मानवता को नमन करें।
डॉ अनिल जैन उपहार
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