Thursday, July 1, 2021

मुक्तक

टूटकर जो गिरा उसको भी सहारा देना।
भूले राही को उम्मीदों का किनारा देना।
ये अभावों का सफर पीछे छूट जाएगा
मन के हारे को उमंगो का सितारा देना।

डॉ अनिल जैन उपहार

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