Tuesday, July 27, 2021

प्रभाव(मुक्तक)

ज़िन्दगी तूने दिखाए वो सपन देख लिए।

फरेबी दुनियां में अपनों के चलन देख लिए।

यहाँ घुलता हुआ रिश्तों में ज़हर देखा है,

अर्थ की दौड़ में लाशो के कफ़न देख लिए।

डॉ अनिल जैन उपहार

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