काव्यांजलि
Wednesday, January 5, 2022
मुक्तक पले जो खार दामन में
पलें जो खार दामन में ज़रा उनकों गला देना ।
मिलें जो दंश अपनों से उन्हें दिल से भुला देना ।
उजाले फिर न भटकेंगे कभी ग़म के अंधेरों में
बुझाये जो कभी दीपक उन्हें फिरसे जला देना ।
-----------डॉ अनिल जैन उपहार -------
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