Monday, June 12, 2023

मुक्तक

भूख बेबसी लाचारी पर फिर कोई अफसाना लिख ।

मजलूमों की आँख से बहते पानी पर भी तराना लिख ।

अबला की चींखों पर तेरी आँखें गर नम होजाये तब,

बेशक फिर  शफ्फाक बदन को तू दिल आशिकाना लिख ।

------अनिल उपहार --------

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