वक़्त की बैसाखी पर
दूसरों का सहारा बन
गुमनाम रास्तों पर
भटकते भटकते ,
अचानक आई आंधी
और तेरे होसलों की
उडान ने ,दिया था
संबल ।
तेरी यादो की बारिश
और गेसुओ की महक
दे गयी प्रतीक्षा की
कभी न खत्म होने वाली
श्रंखला ।
मै आज भी उसी दौराहे पर
अपलक निहार रहा हूँ
तेरी बाट ।
और तुम ये सब देखते ।
काश !तुम यहाँ होते ।
-------अनिल उपहार -------
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