Tuesday, August 8, 2023

समर्पण मन देहरी का,(मुक्तक)

मन देहरी पर देह का ,सच मुच आज समर्पण है ।

अश्रु लगते गंगाजल से ,अर्घ तुम्ही को अर्पण है ।

द्वार पाहुन प्रीत खड़ी है रस्मों की वरमाला ले ,

मुझ में रूप तुम्हारा झलके कैसा मन का दर्पण है ।

--------अनिल उपहार ------

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