Friday, December 15, 2023

मुक्तक (कामनाएं)

फिर मिलन की आस पाले सांस लेकर आ गई।
तृप्ति से अनुबंध लिख कर प्यास लेकर आ गई।
ये उदासी के भंवर रचते रहे नित साजिशे,
कामनाएं मन की सारी सन्यास लेकर आ गई।

डा अनिल जैन उपहार

No comments:

Post a Comment