अनछुए सब पहलुओं का वो बड़ा फनकार क्यूँ है ।
है बहुत कमसिन मगर खामोश सा किरदार क्यूँ है ।
इन वफाओं का चलन भी खो गया तन्हाइयों में
सब देखकर के यूं लगा ये ज़िन्दगी दुश्वार क्यूँ है ।
अनिल जैन उपहार
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