उसकी गली से जब भी गुजरना पड़ता है ।
तूफानों की ज़द से गुज़रना पड़ता है ।
ज़ख्म सभी ताज़ा है अब तक सीने में
अरमानों को रोज़ निगलना पड़ता है ।
अनिल उपहार
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