सारे डर माँ के वो आँचल में छुपा लेता है ।
तंग भी करता है पर सबको हँसा देता है ।
वो भी क्या दौरे मुहब्बत का हंसी लम्हा था
याद करता हूँ तो बचपन का पता देता है ।
अनिल जैन उपहार
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