शोहरत तो हुई हासिल मगर ये याद भी रखना ।
ये वो हिमाला है जो टिकने नही देता ।
नेकियाँ की है तो उन्हें महफूज़ भी रखना
दिखावे का चलन कभी फलने नही देता ।
माँ बाप की खिदमत का जो कर लिया सौदा
बस सोच का ये दायरा उठने नही देता ।
अनिल उपहार
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