Thursday, June 2, 2016

मुक्तक

मैंने हर गीत ग़ज़ल में तुम्ही को गाया है ।

रहूँ कहीं भी मगर साथ तेरा साया है ।

बेवफा कह के बुलाऊँ तो बुलाऊँ कैसे

प्यार करने का हुनर भी तो तुमसे पाया है

।।।।।।।।।। ( 2 )
मेरा मकसद है यही तू सदा ही शाद रहे ।

उसकी रहमत से दिल की बस्ती भी आबाद रहे

मिलन के साथ जुदाई का दौर आता है

मैं तुझमे और तू मुझमे ही ज़िंदाबाद रहे ।

(3)
कभी उदासियों में आँख नम नही करना ।

ज़माना कुछ भी कहे कोई गम नही करना

साथ हमने जो गुज़ारे है उन पलों की कसम

रहें कहीं भी मगर प्यार कम नहीं करना ।
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