भागफल सा प्यार तुम्हारा और गुणक सी तेरी जुदाई ।
समीकरण सा तेरा मिलना योगफल सी बनी खुदाई ।
हासिल सा तेरा रूठ के जाना और व्याकरण भी गहरा है
रिश्तों के इस अंक गणित को भोली आँखें जान न पाई ।
-------------अनिल उपहार -------
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