छंद कविता गीत की पहचान हो ।
शब्दावली हो प्रीत की यशगान हो ।
यूँ भले ही कह नहीं पाया ज़ुबा से
मैं ग़ज़ल हूँ मीत तुम अरकान हो ।
------अनिल उपहार -----
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