इस बार भी आगया करवा चौथ
और देखो न
हर बार की तरह तुम्हारी सलामती का व्रत और
सोलह श्रृंगार बस आपके लिए ।
मेरे ह्रदय पटल पर अंकित है
सारे अनसुलझे प्रश्न
समाधान तो बस तुम ही थे न
आओ आज उस चन्द्रमा की चांदनी में निखार दो
अपनी
चांदनी को
और लिख दो
अपनी उपस्थिति से
मेरे सात जन्मों के साथ के दस्तावेज पर
अपनी वसीयत ।
विश्वास और समर्पण
की यह सम्पदा
सिर्फ बस सिर्फ
मेरी धरोहर थी
सदा रहेगी ।
कभी न खिंचेगी
अविश्वास और अहम की
कोई रेखा
संबंधो के इस सेतु पर ।
बस तुम्हारी ही प्रतीक्षा में ।।।।
अनिल उपहार
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