इक प्रणय गीत है एक प्रणय छंद है ।
तन से तन को मिली जो मधुर गंध है ।
देखा बासंती मन तो नयन कह उठे
प्यास का तृप्ति से आज अनुबंध है ।
अनिल जैन उपहार
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