Thursday, December 1, 2022

 इक प्रणय गीत है एक प्रणय छंद है ।


तन से तन को मिली जो मधुर गंध है ।


देखा बासंती मन तो नयन कह उठे


प्यास का तृप्ति से आज अनुबंध है ।


अनिल जैन उपहार#@कॉपीराइट

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