--- - स्मृति ---
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जीवन जल उलीचती
तुम्हारी यादें,
देह की हर दस्तक में
घोल रही है मिठास |
मुझे याद है,
तुम्हारी वो पहली चिठ्ठी -
उसका हर एक हरफ,
महक रहा है आज भी
तुम्हारी खुशबू से |
मुझे याद है,
तुम्हारे हाथों की वो सुर्ख
मेहंदी,
जिस पर लिखा था मेरा नाम,
ठीक उसी तरह,
जैसे नये वर्ष की अगवानी में
कोई नव यौवना
लिख रही हो प्रेम का अध्याय
शुभाशंषा की तरह |
--------अनिल उपहार ------
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