अर्चना के दीप ले उतारूँ तेरी आरती माँ
वंदना के फूल हैं वरदान कुछ दीजिए |
कलम निर्झरनी बने, शब्दों की नित बहती रहें
लेखनी निर्भय बने ऐसा वर दीजियें |
नील कंठनी कलम रहें सदा ही स्वछंद
गीत मीठे बोलू ऐसे मीठे बोल दीजिए
वीणा पाणी वीणा की झंकार से झंकार मन
ह्रदय के तारों कों वीणा से जोड़ दीजिए |
-----------------अनिल उपहार ----------
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