गज़ल
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उनके सियाह बालों में अब भी महक तो हें
बस् सिर्फ रंग बदला हें लेकिन चमक तो हें |
में क्या बताऊ अब मेरे महबूब कि कमर
पतली नहीँ तो क्या हुआ उसमे लचक तो है |
हम जैसे बद नसीबों कों यारों जहान में
जीने का हक नही तो मरने का हक तो है |
मिलने कों बेक़रार हें कंगन से चुडियां
माना ये दोनों दूर है फिर भी खनक तो है |
माना कि उनका रंग हें उपहार सांवला
सब कुछ हें फिर भी चेहरे के उपर नमक तो है |
---------(अनिल उपहार )
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उनके सियाह बालों में अब भी महक तो हें
बस् सिर्फ रंग बदला हें लेकिन चमक तो हें |
में क्या बताऊ अब मेरे महबूब कि कमर
पतली नहीँ तो क्या हुआ उसमे लचक तो है |
हम जैसे बद नसीबों कों यारों जहान में
जीने का हक नही तो मरने का हक तो है |
मिलने कों बेक़रार हें कंगन से चुडियां
माना ये दोनों दूर है फिर भी खनक तो है |
सब कुछ हें फिर भी चेहरे के उपर नमक तो है |
---------(अनिल उपहार )
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