गज़ल
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मैं गज़ल कहता हूँ, तुम हाथ उठाये रखिये
अपनी अंगडाई कों,मेहराब बनाये रखिये |
सोंचता हूँ मैं तेरी मांग में तारे भर दूँ
मेरी तसवीर कों सीने से लगाये रखिये |
मेरा वादा है मैं आऊंगा जरुर आऊंगा
तुम तो बस घर के चरागों कों बुझाये रखिये |
तुम मेरी और जो देखोगे तो मर जाऊंगा
बस मेरे सामने पलकों कों झुकाये रखिये |
तेरे हाथों से मेरे दिल कों सुकूं मिलता है
दो घड़ी तुम मेरे सीने कों दबाये रखिये |
तुमको बदनाम ना करदे ये जमाने वाले
ऐसे लोगों से तुम अब खुद कों बचाये रखिये |
------ ----- ----- (अनिल उपहार )
'काव्यांजलि' पिडावा (राजस्थान)
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