आस्था, आलम्बन ,विश्वास,
सदियों से यही तो चाहा था,
तुमसे इस समाज ने |
कभी तुम ययाति की बेटी
माधवी बन ,उत्सर्ग करती रही |
कभी त्रेता की रेणुका बन,
नही पूछ पाई कोई प्रश्न
अपने पति या पुत्रों से |
कभी तुम अहिल्या बन,
युग युगों तक इन्द्र के पाप का
दण्ड भोगती रही-
जबकि जानते थे सब,
की तुम छली गई हो,
द्रोपदी के चीर हरण से लेकर
सामूहिक बलात्कार कांड तक |
हर बार तुम्हीं होती रही,
सामाजिक एवं मानसिक रुग्णता की
शिकार |
तुम्हारी इस दशा के लिए
आखिर कौन है जिम्मेदार ?
समाज की सामंत वादी सोच
या
सुन्न पड़ी संवेदना |
कभी तुम कबीर की वाणी का
आधार बनी,
तो कभी जायसी के स्वच्छंद प्रेम
की अभिव्यक्ति-
फिर भी ,हर बार तिल तिल कर
मरती रही हो तुम, और
यह समाज हर बार शब्दों के मरहम से
भुनाता रहा तुम्हें |
निर्भया |तुम्हांरी मौत ने
खड़े किये है अनेक सवाल |
वो सारे प्रश्न है आज भी
अनुत्तरित |
जो शाश्वत, सार्वभौमिक, और सर्वकालिक
उत्तर अवश्य ही ना बन पाए |
इन्हीं में गुम है तुम्हारी रूह के
ताज़ा ज़ख्म,
जो बयां कर रहें है-
औरत होने की अंत हीन पीड़ा कों |
-----अनिल उपहार -------
सदियों से यही तो चाहा था,
तुमसे इस समाज ने |
कभी तुम ययाति की बेटी
माधवी बन ,उत्सर्ग करती रही |
कभी त्रेता की रेणुका बन,
नही पूछ पाई कोई प्रश्न
अपने पति या पुत्रों से |
कभी तुम अहिल्या बन,
युग युगों तक इन्द्र के पाप का
दण्ड भोगती रही-
जबकि जानते थे सब,
की तुम छली गई हो,
द्रोपदी के चीर हरण से लेकर
सामूहिक बलात्कार कांड तक |
हर बार तुम्हीं होती रही,
सामाजिक एवं मानसिक रुग्णता की
शिकार |
तुम्हारी इस दशा के लिए
आखिर कौन है जिम्मेदार ?
समाज की सामंत वादी सोच
या
सुन्न पड़ी संवेदना |
कभी तुम कबीर की वाणी का
आधार बनी,
तो कभी जायसी के स्वच्छंद प्रेम
की अभिव्यक्ति-
फिर भी ,हर बार तिल तिल कर
मरती रही हो तुम, और
यह समाज हर बार शब्दों के मरहम से
भुनाता रहा तुम्हें |
निर्भया |तुम्हांरी मौत ने
खड़े किये है अनेक सवाल |
वो सारे प्रश्न है आज भी
अनुत्तरित |
जो शाश्वत, सार्वभौमिक, और सर्वकालिक
उत्तर अवश्य ही ना बन पाए |
इन्हीं में गुम है तुम्हारी रूह के
ताज़ा ज़ख्म,
जो बयां कर रहें है-
औरत होने की अंत हीन पीड़ा कों |
-----अनिल उपहार -------
aapki kavita lajavab hai badhai
ReplyDeleteaap ki rachnaye bejod hai aise hi maa sharde ke bhandar ko bhrte rhe
ReplyDeleteआपकी होसला अफजाई के लिए दिलसे आभार
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