कैसे कह दे छप्पन इंची सीने का हम दम भरके ।
हर बार रहे खाते मुँह की चौखट पर उनके सर धरके ।
चीख रहा आवाम देश का आजाद करो अब सेना कों ।
दे जवाब उनकी भाषा में बतलादो ये सेना कों ।
कब तक सर काटे जायेंगे पूछ रही भारत माता ।
सोन चिरैया भी शर्मिंदा सुन कर अपनी गौरव गाथा ।
अनिल जैन उपहार
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