समाये घर में चारो धाम तीरथ आओ कर आएँ ।
कि जिन कदमो में जन्नत है चलो उनको मना लाएँ ।
वे पूजा पाठ सजदे ये नमाज़े पूरी होगी तब
कि अब भूले से वृद्धाआश्रम माँ बाप ना जाएँ ।
अनिल उपहार
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