रिश्तों कों व्यापार लिखा है चिठ्ठी में ।
दौलत कों बाज़ार लिखा है चिठ्ठी में ।
राखी के धागे ने सब कुछ लूट लिया
ये भी इक पैगाम लिखा है चिठ्ठी में ।
-------अनिल उपहार -------
दौलत कों बाज़ार लिखा है चिठ्ठी में ।
राखी के धागे ने सब कुछ लूट लिया
ये भी इक पैगाम लिखा है चिठ्ठी में ।
-------अनिल उपहार -------
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