पलें जो खार दामन में ज़रा उनकों गला देना ।
मिलें जो दंश अपनों से उन्हें दिल से भुला देना ।
उजाले फिर न भटकेंगे कभी ग़म के अंधेरों में
कभी जो थे बुझे दीपक ज़रा फिरसे जला देना ।
-----------अनिल उपहार -------
मिलें जो दंश अपनों से उन्हें दिल से भुला देना ।
उजाले फिर न भटकेंगे कभी ग़म के अंधेरों में
कभी जो थे बुझे दीपक ज़रा फिरसे जला देना ।
-----------अनिल उपहार -------
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