घायल मन का गीत है गजल भयी उदास ।
पाती असुवन से लिखूं रहे न साजन पास ।
रिश्तों की इस डोर का रहा नही अब पार ।
स्वारथ ने जब खींच दी घर में बीच दीवार ।
--------अनिल उपहार -------
पाती असुवन से लिखूं रहे न साजन पास ।
रिश्तों की इस डोर का रहा नही अब पार ।
स्वारथ ने जब खींच दी घर में बीच दीवार ।
--------अनिल उपहार -------
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