थी सुहानी सुबह जीवन की वही अब दोपहर है ।
गिरती हुयी दीवार यारों थामना अब बेअसर है ।
दी ज़माने को चूनौती हर कदम हमने ,तभी तो
देखलो ये चाँद तारे अब भी मेरे हम सफ़र है ।
---------अनिल उपहार ------
गिरती हुयी दीवार यारों थामना अब बेअसर है ।
दी ज़माने को चूनौती हर कदम हमने ,तभी तो
देखलो ये चाँद तारे अब भी मेरे हम सफ़र है ।
---------अनिल उपहार ------
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