-----शायद तुम लौट आओ ------
----------------------------
मन का मरुस्थली सन्नाटा तोडती
तुम्हारी यादें
घोल देती थी
देह की हर दस्तक में मिठास ।
पलकों पर सजे सिंदूरी स्वप्न ।
बार बार देते निमंत्रण
मन देहरी पर
भावनाओं के
अक्षत चढाने कों ।
संस्कारों की सड़क के मुसाफिर सा
तुम्हारा बेखोफ चलना ।
तहजीब की ग्रंथावली के
कोमल किरदार को
सलीके से निभाना ।
पढ़ा देना बातों ही बातों में
मर्यादा का पाठ ।
विरदा वलियों का संवाद ।
जिसने रिश्तों के रंग मंच पर
अपना अभिनय
बखूबी करना सिखाया ।
अचानक-
वक़्त की आई तेज आंधी ने
सब कुछ
बिखेर कर रख दिया ।
और धूल धुसरित कर दिया
उन सभी रिश्तों कों ,
जिनकी छाँव में
हमने जीवन के सतरंगी सपनों को
बुना था ।
कहने कों अब नहीं हो
साथ मेरे ।
पर आज भी अहसास ज़िन्दा है
मन के किसी कोने में ।
तुम्हारा शांत नदी सा बहना ।
लहरों सा अठ खेलियाँ करना ।
और
अचानक छोड़ कर चल देना ।
मेरे गीत और छंद सूने है
तुम्हारे बगेर ।
फिर भी विश्वास है कि -
तुम लौट आओगे
और
अधरों पर गीत बन
बिखेर दोगे
अपने माधुर्य की ताज़गी ।
मै अपने गीत और छंद
तुम्हारे नाम करता हूँ ।
श्रध्दा की पावन प्रतिमा
मै तुम्हें प्रणाम करता हूँ ।
--------अनिल उपहार -------
----------------------------
मन का मरुस्थली सन्नाटा तोडती
तुम्हारी यादें
घोल देती थी
देह की हर दस्तक में मिठास ।
पलकों पर सजे सिंदूरी स्वप्न ।
बार बार देते निमंत्रण
मन देहरी पर
भावनाओं के
अक्षत चढाने कों ।
संस्कारों की सड़क के मुसाफिर सा
तुम्हारा बेखोफ चलना ।
तहजीब की ग्रंथावली के
कोमल किरदार को
सलीके से निभाना ।
पढ़ा देना बातों ही बातों में
मर्यादा का पाठ ।
विरदा वलियों का संवाद ।
जिसने रिश्तों के रंग मंच पर
अपना अभिनय
बखूबी करना सिखाया ।
अचानक-
वक़्त की आई तेज आंधी ने
सब कुछ
बिखेर कर रख दिया ।
और धूल धुसरित कर दिया
उन सभी रिश्तों कों ,
जिनकी छाँव में
हमने जीवन के सतरंगी सपनों को
बुना था ।
कहने कों अब नहीं हो
साथ मेरे ।
पर आज भी अहसास ज़िन्दा है
मन के किसी कोने में ।
तुम्हारा शांत नदी सा बहना ।
लहरों सा अठ खेलियाँ करना ।
और
अचानक छोड़ कर चल देना ।
मेरे गीत और छंद सूने है
तुम्हारे बगेर ।
फिर भी विश्वास है कि -
तुम लौट आओगे
और
अधरों पर गीत बन
बिखेर दोगे
अपने माधुर्य की ताज़गी ।
मै अपने गीत और छंद
तुम्हारे नाम करता हूँ ।
श्रध्दा की पावन प्रतिमा
मै तुम्हें प्रणाम करता हूँ ।
--------अनिल उपहार -------
No comments:
Post a Comment