रहने को भले छत नहीं उनका ज़हान है ।
दो वक़्त की रोटी ही उनकी आरती अज़ान है ।
तीज और त्यौहार की तो बात ही हम क्या करें
मुफलिसों के वास्ते ताजिंदगी रमजान है ।
-------अनिल उपहार ------
दो वक़्त की रोटी ही उनकी आरती अज़ान है ।
तीज और त्यौहार की तो बात ही हम क्या करें
मुफलिसों के वास्ते ताजिंदगी रमजान है ।
-------अनिल उपहार ------
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