दंभ दलन करने वाला वह,पौरुष फिर दिखला जाओ ।
नापाक साजिशों कों आकर,मिट्टी में उन्हें मिला जाओ ।
भ्रष्टाचारी विश्दंतों से ,सबकों मुक्त करा जाओ ।
शंखनाद हो आज़ादी का,ऐसा बिगुल बजा जाओ ।
------------अनिल उपहार -----
नापाक साजिशों कों आकर,मिट्टी में उन्हें मिला जाओ ।
भ्रष्टाचारी विश्दंतों से ,सबकों मुक्त करा जाओ ।
शंखनाद हो आज़ादी का,ऐसा बिगुल बजा जाओ ।
------------अनिल उपहार -----
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