कि कोई वक़्त की बैसाखियों को छल नही सकता । सफर में तो यहाँ कोई अकेला चल नही सकता । लगी हो आग कितनी भी भले ही सर से पैरो तक कि हो साया बुज़ुर्गो का वो सच में जल नहीं सकता ।
अनिल उपहार
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