मिलाओ हाथ कितने भी लगाओ या गले उनको
। दिए जो ज़ख्म उसने या भुला दो तुम भले उनको ।
शहीदों की शहादत कह रही है अश्क भर तुमसे
कि छप्पन इंची सीने का दिखादो दम ज़रा उनको
(2)
। पिलाओ दूध कितना भी जहर हर बार उगलेगा
। करेगा हर घड़ी वादे मगर फितरत न बदलेगा ।
सिसकती महंदी हाथों की वो मंगल सूत्र भी बोला ।
लहू क्यों होगया पानी बताओ कब ये उबलेगा ।
(३)
कि अब हालात बदले तो बदलने क्यों नही देते ।
सियासत के सड़े पन्नों को गलने क्यों नही देते ।
करो आज़ाद सेना को ये कहती देश की जनता
निपटना जानते है वो निपटने क्यों नही देते ।
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