मैंने कितनी रातें काटी
तुम पर कोई गीत लिखूं ।
उजियारों की चौखट चूमी
तुमसा ही मन मीत लिखूं ।
द्वार द्वार आँगन देहरी पर
मैंने वंदनवार सजाए ।
कलम डुबोई आँसुओ में
नित शब्दों के अर्घ चढ़ाए ।
अर्थ खोगए व्याकरणी पैमाने
किन शब्दों में रीत लिखूं ।
मन से मन का मिलन करा दे
सचमुच ऐसी प्रीत लिखूं ।
--------अनिल उपहार -------
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