मैं छंद बना और तू गीत होगई ।
रिश्तों की नर्म डोर बंधी प्रीत होगई ।
सन्दर्भ बदलता रहा रस्मो रिवाज़ का
मैं मीत बना और तू मनमीत हो गई ।
अनिल उपहार
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