अभावों के शीला लेख पर लिखी इबारत है पिता ।
दुर्दिनों के दौर में भी थपकी भरी हिदायत है पिता ।
तमाम उम्र तरसते रहै खुद छत के वास्ते ।
बच्चों के हौसलों की जियारत है पिता ।
,,,,,,,अनिल उपहार
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