घर के जो गमले में नागफणी उगाई तो
तुम्हे रात रानी भला रास नही आएगी ।
हुकूमत करते जो रहे अंधियारों की तो
उजालो की किरणे भी आँखें फेर जाऐगी ।
मतवाले रूप पर करना गुरुर मत
प्रीत की पवन से सुहास नही आएगी ।
चाहत के बादलों से करोगे किनारा गर
अधरों पे उगी प्यास फिर लौट जायेगी ।
अनिल उपहार
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