परिंदों के परों को देख मैं उड़ान लिखता हूँ । बिलखते भूख से बचपन का मैं अरमान लिखता हूँ । चलन रिश्ते निभाने का बुज़ुर्गो से ही तो सीखा बुज़ुर्गो की विरासत को मैं हिंदुस्तान लिखता हूँ । ,,,,,,,,
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