प्रिये कविता बन ढल जाना अधरों पर तुम छाने कों ।
अक्षर अक्षर गीत है मेरा व्याकुल मै भी गाने कों ।
प्रणय निवेदन की बेला का कोई मुहूर्त नहीं होता
छंदों की मै पायल लाया प्यार तुम्हारा पाने कों ।
-----------अनिल उपहार -------
अक्षर अक्षर गीत है मेरा व्याकुल मै भी गाने कों ।
प्रणय निवेदन की बेला का कोई मुहूर्त नहीं होता
छंदों की मै पायल लाया प्यार तुम्हारा पाने कों ।
-----------अनिल उपहार -------
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