आतंकवाद के सायें में ही अपना तन मन वार रहे ।
उन्माद बना जेहाद यहाँ वो हद अपनी कर पार रहे ।
मासूमों की किलकारी भी इनकों रास नहीं आई
यौवन के दुश्मन जो थे वो बचपन कों भी मार रहे ।
---------अनिल उपहार ------
उन्माद बना जेहाद यहाँ वो हद अपनी कर पार रहे ।
मासूमों की किलकारी भी इनकों रास नहीं आई
यौवन के दुश्मन जो थे वो बचपन कों भी मार रहे ।
---------अनिल उपहार ------
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