नही हमकों गिला कुछ भी चलो इकरार करते है ।
उम्मीदों के चमन को फिर गुले गुलज़ार करते है ।
सहे है ज़ख्म उल्फत में ये माना साथ में हमने
चलो फिर से हम अपने प्यार का इज़हार करते है ।
----------अनिल उपहार -------
उम्मीदों के चमन को फिर गुले गुलज़ार करते है ।
सहे है ज़ख्म उल्फत में ये माना साथ में हमने
चलो फिर से हम अपने प्यार का इज़हार करते है ।
----------अनिल उपहार -------
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