बाबुल के सपनों की शोभा ,माँ के संस्कारों की थाती ।
जज्बाती पन्नों पर अबतक ,लिखती रही प्यार की पाती ।
मै देहरी का दीप हूँ पगले ,दोनों घर मुझसे रोशन
विश्वासों से पुलकित करता ,मुझकों मन का वृन्दावन ।
---------अनिल उपहार -------
जज्बाती पन्नों पर अबतक ,लिखती रही प्यार की पाती ।
मै देहरी का दीप हूँ पगले ,दोनों घर मुझसे रोशन
विश्वासों से पुलकित करता ,मुझकों मन का वृन्दावन ।
---------अनिल उपहार -------
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