प्रणय गीत सी तुम हो पावन ।
रूप राधिका सा मन भावन ।
उर के कोमल पृष्ठों पर
नूतन विधान सी लगती हो ।
मेरे मन की संसद का
तुम संविधान सी लगती हो ।
--------अनिल उपहार ------
रूप राधिका सा मन भावन ।
उर के कोमल पृष्ठों पर
नूतन विधान सी लगती हो ।
मेरे मन की संसद का
तुम संविधान सी लगती हो ।
--------अनिल उपहार ------
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