लिख कर पाती उजियारों कों
भोर सुहानी लाती है ।
अंधियारे को राह दिखाती
मंगल गीत सुनाती है ।
धरती की आभायें नूतन,
छटा स्वयं बिखराती हैं ।
पुण्य धरा कों वंदन करने
रवि की किरणे आती है ।
--------अनिल उपहार ------
भोर सुहानी लाती है ।
अंधियारे को राह दिखाती
मंगल गीत सुनाती है ।
धरती की आभायें नूतन,
छटा स्वयं बिखराती हैं ।
पुण्य धरा कों वंदन करने
रवि की किरणे आती है ।
--------अनिल उपहार ------
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