-------शब्द-----------
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शब्द प्रात:कालीन समीरण का नाद है ,
निरंकुश उड़ने वाले पक्षियों का आल्हाद है,
वियोगी का उन्माद है ।
शब्द अखंड ज्योति है ।
जिससे ऊर्जा पाकर
समग्र जीवन में
खिलने लगते है विश्वास के फूल,
जलने लगते है आस्था के दीप
और
फूटने लगते है कल्पना के स्त्रोत
जो नदी बनकर समाहित हो जाते है
विचारों के गहरे समंदर में ।
शब्द अनुभूति की माटी
और संवेदना के जल से
विचारों को गूँथ कर
रचना को देता है आकार ।
बनाता है सपनों को साकार ।
शब्द कभी करता है विचरण
घने जंगलों में ,
तो कभी मिलन की अमराईयों में ।
कभी प्यार बनकर खनकता है
प्रियतमा की पायल और चूड़ियों में ।
शब्द साधना का संगीत है ।
संस्कृति का संवाहक है ।
विचारों का वैभव है ।
भावनाओं का भंडार है ।
संस्कारों का सागर है ।
चेतना का आधार है ।
जीवन की धुरी है ।
इसके बिना सृजन की यात्रा अधूरी है ।
------------@अनिल उपहार ----
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शब्द प्रात:कालीन समीरण का नाद है ,
निरंकुश उड़ने वाले पक्षियों का आल्हाद है,
वियोगी का उन्माद है ।
शब्द अखंड ज्योति है ।
जिससे ऊर्जा पाकर
समग्र जीवन में
खिलने लगते है विश्वास के फूल,
जलने लगते है आस्था के दीप
और
फूटने लगते है कल्पना के स्त्रोत
जो नदी बनकर समाहित हो जाते है
विचारों के गहरे समंदर में ।
शब्द अनुभूति की माटी
और संवेदना के जल से
विचारों को गूँथ कर
रचना को देता है आकार ।
बनाता है सपनों को साकार ।
शब्द कभी करता है विचरण
घने जंगलों में ,
तो कभी मिलन की अमराईयों में ।
कभी प्यार बनकर खनकता है
प्रियतमा की पायल और चूड़ियों में ।
शब्द साधना का संगीत है ।
संस्कृति का संवाहक है ।
विचारों का वैभव है ।
भावनाओं का भंडार है ।
संस्कारों का सागर है ।
चेतना का आधार है ।
जीवन की धुरी है ।
इसके बिना सृजन की यात्रा अधूरी है ।
------------@अनिल उपहार ----
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