चले गर वक़्त की आंधी संभलना मत उछल जाना।
कहीं तुम देखकर रंगी नजारे मत मचल जाना।
न डरना तुम ज़माने की बदलती इन फिजाओं से।
भले बदले यहाँ मौसम मगर तुम मत बदल जाना ।
-------अनिल उपहार ------
कहीं तुम देखकर रंगी नजारे मत मचल जाना।
न डरना तुम ज़माने की बदलती इन फिजाओं से।
भले बदले यहाँ मौसम मगर तुम मत बदल जाना ।
-------अनिल उपहार ------
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