मिलन के सपने चूर मत करना ।
अपनी नज़रों से दूर मत करना ।
गैर के डर से छोड़ जाओ कहीं
ज़ुल्म ऐसा हुजुर मत करना ।
-------अनिल उपहार ------
अपनी नज़रों से दूर मत करना ।
गैर के डर से छोड़ जाओ कहीं
ज़ुल्म ऐसा हुजुर मत करना ।
-------अनिल उपहार ------
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