Friday, March 27, 2015

मिलन के सपने चूर मत करना ।

 अपनी नज़रों से दूर मत करना ।

गैर के डर से छोड़ जाओ कहीं

ज़ुल्म ऐसा हुजुर मत करना ।

-------अनिल उपहार ------

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