रागिनी राग से जब अलग होगयी ।
नींद आँखों में पली ख्वाब तलब होगयी।
जाती रही उम्मीद की हर किरण दूर तक
चांदनी चाँद से कल अलग होगयी ।
------अनिल उपहार -----
नींद आँखों में पली ख्वाब तलब होगयी।
जाती रही उम्मीद की हर किरण दूर तक
चांदनी चाँद से कल अलग होगयी ।
------अनिल उपहार -----
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