चलो छंदों की पायल में तुम्हे फिरसे सजालूं में ।
मेरी गजलो का तू उन्वान है मतला बनालूं में ।
घायल गीत है तुम बिन सिसकती हर रुबाई है
हजारों गम भुलाकर के तुझे अपना बनालूं में ।
----------अनिल उपहार -------
मेरी गजलो का तू उन्वान है मतला बनालूं में ।
घायल गीत है तुम बिन सिसकती हर रुबाई है
हजारों गम भुलाकर के तुझे अपना बनालूं में ।
----------अनिल उपहार -------
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